हर बार की तरह ही इस बार भी जिला संघर्ष समिति डीडीहाट ने 9 पोंड का केक काटकर जताया आक्रोश

 

15 अगस्त 2011 को बीजेपी की रमेश पोखरियाल सरकार ने 4 जिले की घोषणा की थी ,जिसमे गड़वाल व कुमाऊं के दो -दो जिले क्रमशः कोटद्वार, यमुनोत्री, रानीखेत और डीडीहाट शामिल थे।  लेकिन 9 वर्ष बीतने पर भी जिलों को अभी तक अस्तित्व में नहीं लाया गया है।

अभिव्यक्ति न्यूज़ : उत्तराखंड


डीडीहाट जिले की मांग सन् 1960 से चलती आ रही है। क्योंकि पिथौरागढ़ नेपाल और चीन सीमा से लगा हुआ जिला है। और भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार डीडीहाट पूरे जिले का केंद्र बिंदु है। और जिला बनने के बाद दूरस्थ क्षेत्र जो जिला मुख्यालय नहीं पहुंच पाता वो भी आसानी से विकास की और अग्रसर होगा।


डीडीहाट संघर्ष समिति के सदस्य श्रीमान लवी कफलिया जी का कहना है, की जिला संघर्ष समिति हमेशा ही संघर्ष करती आई है, और जल्द से जल्द डीडीहाट जिले को अस्तित्व में नहीं लाया गया तो पूरी घोषित जिले की जनता के साथ मिलकर उग्र से उग्र आंदोलन किया जाएगा।


इस कार्यक्रम में डीडीहाट जिला संघर्ष समिति के पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष गोविंद लाल शाह,  सभासद कवींद्र शाही,धन सिंह कफलिया,शेर सिंह शाही,पुष्पा देउपा,चंचल चौहान,राजू बोरा, ,प्रदेश सचिव कोंग्रेस ललित चुफाल,गिरधर बोरा,क्षेत्र पंचायत सदस्य  कुंदन लोहिया ,ग्राम प्रधान हाट नीरज शाह उर्फ राणा,पुष्कर मेहता,लवी कफलीया, माही बोरा,रवि बोरा,सौरव शाह,एवं डीडीहाट विधानसभा की सम्मानित जनता उपस्थित रही।

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